मि़त्रों, आपने पहले भी म्यूच्युअल फंड के बारे में सुना होगा। म्यूच्युअल फंड रूपयों को निवेश करने का साधन है जिसके द्वारा इंवेस्टर्स असेट मेनेजमेंट कंपनी को रूपये जमा करते है। यह निवेश शार्ट टर्म एवं लांग टर्म के लिये किया जा सकता है। इस रूपये का उपयोग असेट मेनेजमेंट कंपनी म्यूच्युअल फंड में निवेशकों की पर्मीशन के मुताबिक करती है। निवेशकों को रूपये के बदले युनिट ंअलाॅट करती है। जब भी निवेशक को रूपये वापस चाहिये होते है वह इन युनिट को बेच सकता है।
रूपये इंवेस्ट करने का उद्देश्य अपने रूपयों पर एक विशेष समय की अवधि में लाभ कमाना ही होता है। म्यूच्युअल फंड पर शेयर बाजार के रिस्क फेक्टर का भी प्रभाव होता है। रिस्क फेक्टर को कम या अधिक अपने गोल के आधार पर किया जा सकता है। मतलब आप यदि कम समय मंे ज्यादा लाभ कमाना चाहते है तो आपका रिस्क भी बढ जाता है।
एक असेट मेेनेजमेंट कंपनी में कई म्यूच्युअल फंड होते है एवं प्रत्येक फंड का विशेष गोल होता है। हर म्यूच्युअल फंड का एक फंड मेनेजर होता है जो शेयर मार्केट की कंपनीज में फंड के नियमानुसार रूपये इंवेस्ट करता है। इंवेस्टमेंट करने के बाद जो भी लाभ/हानि होती है वह निवेशकों में बांट दी जाती है।
क्या म्यूच्युअल फंड में इंवेस्टमें करने में रिस्क होता है ?
म्युचुअल फंड बाजार के जोखिम के अधीन होते है मतलब उनमें रिस्क फेक्टर होता है। रिस्क फेक्टर को हम लाभ कमाने के उद्देश्य के आधार पर कम या अधिक कर सकते है। हम यदि कम समय में अधिक लाभ कमाना चाहते है तो हमरा रिस्क फेक्टर भी उतना ही बढ जाता है।
कुछ ऐसे फंड भी होते है जिनमें रिस्क बहुत कम होता है एवं उनका प्राॅफिट भी फिक्स डिपाॅजिट के ब्याज की तुलना में ज्यादा होता है। इस प्रकार के फंड को डेब्ट फंड कहा जाता है। इस प्रकार के म्यूचुअल फंड में निवेश काॅरपोरेट फिक्सडिपाॅजिट एवं सरकारी योजनाओं में किया जाता है। डब्र्ट म्यूच्युअल फंड में रिटर्न एफ डी के मुकाबले लगभग 2 प्रतिशत ज्यादा हो सकतेे है।
एक अच्छा म्यूच्युअल फंड हमें 15 प्रतिशत से 30 प्रतिशत तक का रिटर्न भी एक वर्ष के समय में दे सकता है। अपनी रिस्क लेने की क्षमता के आधार पर आप आसानी से म्यूच्युअल फंड में निवेश कर सकते है।
अपनी रिस्क लेने की केपेसिटी का असेसमेंट कैसे करें ?
यदि आप भी म्युच्युअल फंड में इंवेस्टमेंट करना चाहते है परंतु अपनी रिस्क लेने की क्षमता का असेसमेंट नही कर पा रहे है तो नीचे दिये उदाहरण से आप अपनी रिस्क लेने की क्षमता को समझ सकते है।
मन लिजीये, यदि आपकी उम्र 25 साल है तो आप अपनी लाईफ में सबसे ज्यादा रिस्क लेने की कंडीशन में होते है क्योंकि पूरी लाईफ में आप पैसे कमाने की कंडीशन में होते है। इस उम्र में आप पर फेमिली की रिसपाॅसबलिटी भी शुरू नही होती है।
वहीं यदि हम बात करे 40 वर्ष की उम्र वाले किसी व्यक्ति पर रिस्पान्सबलिटी अधिक होती है क्यांेकि उसे अपने परिवार के सदस्यों, जैसे बच्चों एवं माता पिता आदि के साथ साथ घर के कामों में भी खर्च करना होता है, साथ ही उनके भविष्य के लिये पैसे भी बचाना होते है।
वहीं यदि 50 वर्ष की आयु के किसी व्यक्ति की आय का एक बडा भाग बच्चों की पढाई एवं उनकी शादी में खर्च होता है। साथ ही उन्हे अपनी रिटायरमेंट एवं हेल्थ ईशुज के लिये भी पैसे की बचत करनी होती है।
उपरोक्त उराहरण में 50 वर्ष की आयु वाले व्यक्ति का रिस्क लेने की केपेसिटी सबसे कम है जबकि 40 वर्ष वाले व्यक्ति की मध्यम एवं 25 वर्ष वाले व्यक्ति की सबसे अधिक है।
इस प्रकार कोई भी व्यक्ति अपनी रिस्क केपेसिटी का असेसमेंट अपनी आय एवं अपने शार्ट एवं लांग टर्म में होने वाले खर्चो के आधार पर कर सकते है।
म्यूच्युअल फंड कितने प्रकार के होते है ?
रिस्क प्रोफाईल के आधार पर म्यूच्युअल फंड तीन प्रकार के होते है।
1 इक्विटी फंड- इक्विटी फंड मुख्य रूप से विभिन्न कंपनियों के शेयरों मे निवेश करते है। शेयर के भाव कम या ज्यादा होने का असर हमारे फंड पर भी पडता है जिससे हमारे निवेश किये गये रूपये ज्यादा या कम भी हो सकता है। इस प्रकार के म्यूच्युअल फंड में रिस्क सर्वाधिक अधिक होता है।
2 डेट फंड- डेट फंड में सरकारी सिक्योरिटीज जैसे बांड/ट्रेजरी में निवेश किया जाता है। इस प्रकार के फंड में इक्विटी फंड के मुकाबले में कम रिस्क होता है। सामान्यतः इसमें निवेश उन लोगो के द्वारा किया जाता है जो रिस्क नहीं लेना पसंद करते हो। इस प्रकार के म्यूच्युअल फंड में रिस्क कम होता है।
3 बैलेंस्ड एंड हाईब्रिड फंड- यह फंड इक्विटी एवं डेट फंड का कांबीनेशन होता है। इस फंड में उपर दिये दोनों प्रकार से निवेश किया जाता है। इस फंड में निवेशक को इक्विटी फंड के जैेसे लाभ के साथ साथ डेट फंड जैसे सुरक्षित फंड के रिजल्ट मिलते है। बैलेंस्ड एंड हाईब्रिड फंड में अच्छी ग्रोथ मिलने के साथ साथ रिस्क भी इक्विटी फंड के मुकाबले कम होती है। बैलेंस्ड एवं हाईब्रिड फंड में मध्यम स्तर का रिस्क होता है।
अच्छे म्यूच्युअल फंड की क्या खास बात होती है ?
एक अच्छा म्यूचुअल फंड ना सिर्फ पैसे की जरूरत को निश्चित समय पर पूरा करता है साथ ही मार्केट इंडेक्स के मुकाबले अच्छा प्राॅफिट भी देता है।


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